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संसार के सभी धर्मों की अच्छी बातें योग में है. योग के अंग यम में अहिंसा सत्य अस्तेय ब्रह्मचर्य और अपरिगृह सभी धर्मों का सार है. अहिंसा न हिंदू है ,न मुस्लिम है, न सिख है, न परसी है. यही बातें सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिगृह पर भी लागू होती है. कोई भी ... आगे पढ़ें...

योग के बीना भगवान नही मिल सकते है, योग द्वारा स्वरूप की प्राप्ति होती है. रामायण में लिखा है- मम दर्शन फल परम अनूपा, जीव पावे निज सहज स्वरूपा आगे पढ़ें...