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योग सार्वभौमिक धर्म है

संसार के सभी धर्मों की अच्छी बातें योग में है. योग के अंग यम में अहिंसा सत्य अस्तेय ब्रह्मचर्य और अपरिगृह सभी धर्मों का सार है. अहिंसा न हिंदू है ,न मुस्लिम है, न सिख है, न परसी है. यही बातें सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिगृह पर भी लागू होती है. कोई भी धर्म असत्य बोलने के नहीं कहता और न ही चोरी करने के लिए कहता है,अर्थात अस्तेय के पालन का संदेश देता है. सभी धर्म ब्रह्मचर्य के पालन पर जोर देते, अपरिगृह अर्थात अवश्यकता से अधिक वस्तु जोड़ने को सभी माना करते है
सत्यवीर सिंह 'मुनि'
प्रधान योगाचार्य
अखिल भूमंड्लीय सर्वशिरोमणि मुनि समाज दिल्ली


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