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योग के बिना भगवान नही.

योग के बीना भगवान नही मिल सकते है, योग द्वारा स्वरूप की प्राप्ति होती है. रामायण में लिखा है-
मम दर्शन फल परम अनूपा, जीव पावे निज सहज स्वरूपा

अस्वीकरण